Please share this

Bhartiya Rajvyavastha

Bhartiya Rajvyavastha : संवैधानिक विकास

  • 1772 में गुप्त समिति के प्रतिवेदन के आधार पर 1773 में रेग्यूलेटिंग एक्ट पारित किया गया, जिसके तहत 1774 में बंगाल में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई जिसके मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
  • 1773 में रेग्युलेटिंग एक्ट के तहत कानून बनाने का अधिकार गवर्नर जनरल सहित उसकी कार्यकारी परिषद् को दे दिया गया तथा कानून लागू करने के लिए भारत सचिव की अनुमति को अनिवार्य कर दिया गया।
  • 1784 के पिट्स इण्डिया एक्ट के तहत 6 सदस्यीय बोर्ड ऑफ कण्ट्रोल की स्थापना की गई, जिसकी नियुक्ति ब्रिटिश सम्राट के द्वारा होती थी, जिसमें वित्तमन्त्री व विदेश सचिव के अलावा 4 सदस्य प्रिवी काउन्सिल से चुने जाते थे।
  • 1833 ई. में चार्टर एक्ट के तहत भारत में दास प्रथा गैर-कानूनी घोषित कर 1843 में इसका उन्मूलन कर दिया गया। बंगाल का गवर्नर जनरल अब भारत का गवर्नर जनरल हो गया।
  • 1853 के चार्टर एक्ट के तहत निदेशक मण्डल की सदस्य संख्या 24 से घटााकर 18 कर दी, कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा की व्यवस्था की गई तथा कानून सदस्य को परिषद् का पूर्ण सदस्य बना दिया गया।
  • 1861 के भारतीय परिषद् अधिनियम के तहत बंगाल (1862), उत्तर-पश्चिम सीमा प्रान्त (1866) तथा पंजाब (1897) में विधानपरिषद् का गठन कर कानून निर्माण में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल किया गया तथा पोर्ट फोलियो प्रणाली को मान्यता दी गई।
  • 1892 के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा विधिनिर्मात्री संस्था में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या 10 से बढ़ाकर 16 कर दी गई और बजट पर बहस करने तथा प्रश्न पूछने का अधिकार दे दिया गया।
  • 1909 का भारतीय परिषद् अधिनियम को मार्ले-मिण्टो सुधार के नाम से भी जाना जाता है। इसमें पहली बार मुस्लिमों के लिए पृथक् निर्वाचन की व्यवस्था की गई तथा केन्द्रीय व प्रान्तीय विधानसभा में निर्वाचित सदस्यों की संख्या को बढ़ा दिया गया और गवर्नर जनरल की परिषद् में एक भारतीय सत्येन्द्र सिन्हा को नियुक्त किया गया।
  • भारत शासन अधिनियम, 1919 (जिसे मॉण्टेग्यू चेम्सफोर्ड प्रतिवदेन भी कहते हैं) के पहली बार लागू होने के बाद 1922 में महात्वा गाँधी ने कहा था कि भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छानुसार होगा। 1923 में तेजबहादुर सप्रू की अध्यक्षता में कॉमन वेल्थ ऑफ इण्डिया का प्रारूप तैयार किया गया।
  • प्रान्तों में द्वैध-शासन की शुरुआत की गई तथा प्रान्तीय कार्यकारिणी परिषद् को दो भागों (आरक्षित तथा हस्तान्तरित) में बाँट दिया गया। द्वैत शासन पद्धति 1 अप्रैल, 1921 को लागू की गई, जो 1 अप्रैल 1937 तक चलती रही। प्रान्तीय व्यवस्थापिका के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई तथा प्रान्तीय परिषदों को विधानपरिषद् की संज्ञा दी गई और महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया गया, परन्तु केन्द्र में द्विसदनी विधानसभा राज्य परिषद् में महिलाओं की सदस्यता हेतु उपयुक्त नहीं समझा गया।
  • केन्द्रीय व्यवस्थापिका को द्विसदनीय केन्द्रीय विधानपरिषद् (निम्न-सदन) तथा राज्यपरिषद् (उच्च-सदन) बना दिया गया, जिसमें निम्न-सदन की सदस्य संख्या 145 तथा कार्यकाल 3 वर्ष और उच्च सदन की सदस्य संख्या 60 तथा कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया।
  • हस्तान्तरित विषयों का प्रशासन मन्त्रियों की सलाह से गवर्नर जनरल करता था, जो व्यवस्थापिका द्वारा निर्वाचित होते थे तथा उसी के प्रति उत्तरदायी होते थे। गवर्नर जनरल अध्यादेश जारी कर सकता था, जो 6 माह तक प्रभावी रहता था।
  • संघीय विधानमण्डल द्विसदनीय होता था, जिसमें राज्यपरिषद् (उच्च-सदन) स्थायी सदन, तथा इसमें सदस्य संख्या 260 थी और संघीय सभा (निम्न-सदन) अस्थायी सदन, जिसमें सदस्य संख्या 375 तथा कार्यकाल 5 वर्ष था।
  • सभी विषयों को केन्द्र, राज्य व समवर्ती सूची में बाँट दिया गया और समस्त कार्यों का संचालन गवर्नर जनरल ताज के प्रतिनिधि के रूप में करता था।
  • प्रान्तों में द्वैध-शासन को समाप्त कर केन्द्र में द्वैध शासन की स्थापना की गई तथा संघीय न्यायालय (1937) तथा संघीय बैंक (1935) की स्थापना की गई।
  • वर्ष 1940 के अगस्त प्रस्ताव के तहत भारत के लिए डोमिनियम स्टेट्स को मुख्य लक्ष्य माना गया तथा युद्ध के बाद संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव रखा गया।
  • वर्ष 1940 में मुस्लिम लीग ने पृथक् पाकिस्तान की माँग की तथा नेहरू ने संविधान सभा की माँग को मूर्त रूप प्रदान किया।
  • क्रिप्स मिशन वर्ष 1942 में भारत आया, जिसने देशी रियासतों तथा प्रान्तों को मिलाकर संघ बनाने की तथा भारतीय संविधान की रचना, निर्वाचित संविधान सभा द्वारा कराने की और राष्ट्रकुल में भारत को बराबरी की भागीदारी देने का प्रस्ताव रखा।
  • 1946 के कैबिनेट मिशन के तहत निम्न प्रावधान थे – एक भारतीय संघ का गठन और संविधान सभा का गठन किया जाएगा, जिसमें 10 लाख की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि चुना जाएगा।
  • एटली घोषणा के अनुसार, अंग्रेज सरकार 30 जून, 1948 तक भारतीयों को सत्ता सौंप देगी तथा माउण्टबेटन लॉर्ड वेवेल की जगह भारत के वायसराय नियुक्त किए गए।
  • वायसराय द्वारा बिना मुस्लिम लीग की सहमति के कार्यकारिणी समिति को गठित कर दिया गया, जिसका मुस्लिम लीग ने विरोध किया और 16 अगस्त, 1946 को प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया।
  • 24 अगस्त, 1946 को अन्तरिम सरकार के गठन की घोषणा की गई, जिसके फलस्वरूप 2 सितम्बर, 1946 को जवाहर लाल नेहरू ने अपने 11 सहयोगियों के साथ अन्तरिम सरकार का गठन किया। मुस्लिम लीग ने अपने को सरकार से अलग रखा, लेकिन बाद में 26 अक्टूबर, 1946 को सरकार में शामिल हुई।
  • अन्तरिम सरकार में कांग्रेस के 3 सदस्य (सैयद अली जहीर, शरतचन्द्र बोस, सर शफात अहमद खाँ) ने इस्तीफा दे दिया तथा मुस्लिम लीग के 5 सदस्य (जोगेन्द्र नाथ, गजनफर अली, लियाकत अली, आई आई चुन्दरीगर, अब्दुलरब निश्तर) को शामिल किया गया।
  • 11 दिसम्बर, 1946 को मुस्लिम लीग की अनुपस्थिति में संविधान सभा का गठन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में कर दिया गया।

Bhartiya Rajvyavastha : संविधान सभा

  • भारत की संविधान सभा का निर्माण कैबिनेट मिशन 1946 के तहत किया गया, जिसमें 389 सदस्य (292 प्रान्तों से, 3 मुख्य आयुक्त प्रान्त से, 93 देशी रियासतों से सर्वप्रथम नेररू ने हस्ताक्षर किया था से तथा 1 बलूचिस्तान से) थे।
  • संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को हुई तथा सच्चिदानन्द सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।
  • 11 दिसम्बर, 1946 को संविधान सभा द्वारा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष तथा एस सी मुखर्जी को उपसभापति और बी एन राव को संविधान सभा के सलाहकार पद पर चुना गया।
  • संविधान सभा ने 22 समितियों का गठन किया, जिनमें से 12 समितियाँ मूल मामलों से तथा 10 समितियाँ कार्यविधि मामलों से सम्बन्धित थीं। उपरोक्त समितियों की रिपोर्ट के आधार पर प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर ने संविधान का एक पारूप तैयार किया, जिसे वर्ष 1948 में प्रकाशित कर दिया गया।
  • संविधान सभा की अन्तिम बैठक 24 नवम्बर, 1949 को आयोजित की गई। इसी दिन 284 लोगों ने संविधान पर हस्ताक्षर किया। संविधान सभा ने संविधान को 26 नवम्बर, 1949 को अपना लिया तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने उस पर हस्ताक्षर कर दिए, इसे बनाने में 2 वर्ष 11 माह व 18 दिन का समय लगा। संविधान लागू होने से दो दिन पूर्व 24 जनवरी, 1950 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत का राष्ट्रपति चुना गया एवं राष्ट्रीय गीत व राष्ट्रीय गान को अपनाया गया।
  • प्रारूप समिति में 1 अध्यक्ष और 6 सदस्य थे। अत: यह 7 सदस्यीय समिति थी, जिसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे अन्य सदस्य एन गोपालास्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, के एम मुन्शी, मोहम्मद सादुल्ला, वी एल मित्र बाद में एन माधवन राव, डी पी खेतान टी कृष्णामाचारी।
  • डॉ. अम्बेडकर का संविधान सभा में निर्वाचन बंगाल से हुआ तथा इनको संविधान का जनक माना जाता है।

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of
Close Menu